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रामायण फिल्म (नितेश तिवारी निर्देशित) - मुख्य कथा सार
नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित और रणबीर कपूर (राम), साई पल्लवी (सीता) तथा यश (रावण) द्वारा अभिनीत यह दो-भागों वाली फ़िल्म महर्षि वाल्मीकि के पौराणिक महाकाव्य पर आधारित है।
कथानक के प्रमुख चरण
* बाल कांड एवं सीता स्वयंवर: अयोध्या के राजकुमार श्री राम महर्षि विश्वामित्र के मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त करते हैं। मिथिला में आयोजित सीता स्वयंवर में राम भगवान शिव का दिव्य धनुष (पिनाक) उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं और सीता से विवाह करते हैं।
* वनवास की आज्ञा: राम के राज्याभिषेक की पूर्व संध्या पर, रानी कैकेयी अपने दो वरदानों के तहत राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और अपने पुत्र भरत के लिए सिंहासन मांगती हैं। राम अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सीता और लक्ष्मण के साथ वन चले जाते हैं।
* सीता हरण: दंडकारण्य वन में सुरपणखा का अपमान होने पर, लंकापति रावण प्रतिशोध लेने के लिए कपटपूर्वक (सोने के हिरण का छलावा देकर) सीता का अपहरण कर लंका ले जाता है।
* वानर सेना से मित्रता व हनुमान जी का योगदान: सीता की खोज में दक्षिण की ओर बढ़ते हुए राम और लक्ष्मण की मुलाकात सुग्रीव और हनुमान जी से होती है। हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका के अशोक वाटिका में सीता जी का पता लगाते हैं।
* लंका युद्ध व विजय: 'राम सेतु' का निर्माण कर राम वानर सेना के साथ लंका पहुंचते हैं। भयंकर युद्ध के बाद राम रावण का वध करते हैं, सीता जी को मुक्त कराते हैं और अयोध्या लौटकर उनका भव्य राज्याभिषेक होता है।
भाग 1 एवं भाग 2 की संरचना
| फ़िल्म | कथा की सीमा | मुख्य केंद्र बिंदु |
|---|---|---|
| रामायण: भाग 1 | बाल्यकाल से सीता हरण तक | राम का बचपन, स्वयंवर, राजमहल का षड्यंत्र, 14 वर्ष का वनवास और रावण द्वारा सीता का अपहरण। |
| रामायण: भाग 2 | वानर मित्र संघ से राज्याभिषेक तक | सुग्रीव-हनुमान से मित्रता, राम सेतु का निर्माण, लंका का महायुद्ध, रावण वध और अयोध्या वापसी। |
नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित और रणबीर कपूर (राम), साई पल्लवी (सीता) तथा यश (रावण) द्वारा अभिनीत यह दो-भागों वाली फ़िल्म महर्षि वाल्मीकि के पौराणिक महाकाव्य पर आधारित है।
कथानक के प्रमुख चरण
* बाल कांड एवं सीता स्वयंवर: अयोध्या के राजकुमार श्री राम महर्षि विश्वामित्र के मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त करते हैं। मिथिला में आयोजित सीता स्वयंवर में राम भगवान शिव का दिव्य धनुष (पिनाक) उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं और सीता से विवाह करते हैं।
* वनवास की आज्ञा: राम के राज्याभिषेक की पूर्व संध्या पर, रानी कैकेयी अपने दो वरदानों के तहत राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और अपने पुत्र भरत के लिए सिंहासन मांगती हैं। राम अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सीता और लक्ष्मण के साथ वन चले जाते हैं।
* सीता हरण: दंडकारण्य वन में सुरपणखा का अपमान होने पर, लंकापति रावण प्रतिशोध लेने के लिए कपटपूर्वक (सोने के हिरण का छलावा देकर) सीता का अपहरण कर लंका ले जाता है।
* वानर सेना से मित्रता व हनुमान जी का योगदान: सीता की खोज में दक्षिण की ओर बढ़ते हुए राम और लक्ष्मण की मुलाकात सुग्रीव और हनुमान जी से होती है। हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका के अशोक वाटिका में सीता जी का पता लगाते हैं।
* लंका युद्ध व विजय: 'राम सेतु' का निर्माण कर राम वानर सेना के साथ लंका पहुंचते हैं। भयंकर युद्ध के बाद राम रावण का वध करते हैं, सीता जी को मुक्त कराते हैं और अयोध्या लौटकर उनका भव्य राज्याभिषेक होता है।
भाग 1 एवं भाग 2 की संरचना
| फ़िल्म | कथा की सीमा | मुख्य केंद्र बिंदु |
|---|---|---|
| रामायण: भाग 1 | बाल्यकाल से सीता हरण तक | राम का बचपन, स्वयंवर, राजमहल का षड्यंत्र, 14 वर्ष का वनवास और रावण द्वारा सीता का अपहरण। |
| रामायण: भाग 2 | वानर मित्र संघ से राज्याभिषेक तक | सुग्रीव-हनुमान से मित्रता, राम सेतु का निर्माण, लंका का महायुद्ध, रावण वध और अयोध्या वापसी। |

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