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तुमसे मिलने की वजह ❤️
अनुज को प्यार पर बिल्कुल विश्वास नहीं था।
उसका मानना था कि प्यार सिर्फ़ फिल्मों में अच्छा लगता है, असली जिंदगी में नहीं।
फिर एक दिन उसकी मुलाक़ात रिया से हुई।
कॉलेज की लाइब्रेरी में रिया हमेशा खिड़की के पास बैठकर किताब पढ़ती थी। अनुज कई दिनों से उसे देख रहा था, लेकिन बात करने की हिम्मत नहीं हुई।
एक दिन रिया ने खुद पूछा—
“आप रोज़ मुझे देखते हैं… कुछ कहना है?”
अनुज घबरा गया।
“नहीं… बस आपकी किताब अच्छी लगी।”
रिया ने किताब उसकी तरफ बढ़ा दी।
“तो पढ़ लीजिए।”
उस दिन से दोनों की दोस्ती शुरू हो गई।
धीरे-धीरे अनुज को रिया की आदत हो गई। सुबह उसका मैसेज, दोपहर की छोटी-सी मुलाकात और शाम को घंटों बातें—सब उसकी जिंदगी का हिस्सा बन गया।
एक दिन अनुज ने हिम्मत करके पूछा—
“रिया, अगर कोई तुम्हें बहुत प्यार करे, तो क्या तुम उसका साथ दोगी?”
रिया ने मुस्कुराकर कहा—
“पहले वो कहे तो सही कि प्यार करता है।”
अनुज चुप हो गया।
रिया ने उसकी आँखों में देखकर कहा—
“कभी-कभी जवाब सुनने के लिए सवाल पूछना ज़रूरी नहीं होता।”
अनुज समझ गया।
लेकिन उसी रात रिया का फोन बंद हो गया।
अगले दिन भी वह कॉलेज नहीं आई।
तीन दिन बाद अनुज को पता चला कि रिया अपने परिवार के साथ दूसरे शहर चली गई है।
अनुज ने उसे बहुत फोन किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
महीने गुजर गए।
एक दिन उसे रिया का संदेश मिला—
“मुझे माफ़ कर देना। मुझे लगा था कि दूर जाना आसान होगा, लेकिन हर दिन तुम्हारी याद आती रही।”
अनुज ने तुरंत जवाब दिया—
“तो वापस आ जाओ।”
कुछ देर बाद सिर्फ़ एक फोटो आई।
रेलवे स्टेशन की।
नीचे लिखा था—
“मैं आ चुकी हूँ… अब तुम्हारी बारी है।”
अनुज भागता हुआ स्टेशन पहुँचा।
प्लेटफॉर्म पर रिया खड़ी थी।
दोनों कुछ सेकंड तक बस एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर रिया ने पूछा—
“अब भी प्यार पर विश्वास नहीं है?”
अनुज मुस्कुराया और उसका हाथ पकड़ लिया।
“प्यार पर नहीं… तुम पर विश्वास है।”
रिया की आँखों में आँसू आ गए।
उस दिन अनुज समझ गया—
कभी-कभी जिंदगी हमें किसी इंसान से इसलिए नहीं मिलाती कि वह हमेशा हमारे साथ रहे… बल्कि इसलिए मिलाती है कि वह हमें प्यार करना सिखा सके। ❤️
अनुज को प्यार पर बिल्कुल विश्वास नहीं था।
उसका मानना था कि प्यार सिर्फ़ फिल्मों में अच्छा लगता है, असली जिंदगी में नहीं।
फिर एक दिन उसकी मुलाक़ात रिया से हुई।
कॉलेज की लाइब्रेरी में रिया हमेशा खिड़की के पास बैठकर किताब पढ़ती थी। अनुज कई दिनों से उसे देख रहा था, लेकिन बात करने की हिम्मत नहीं हुई।
एक दिन रिया ने खुद पूछा—
“आप रोज़ मुझे देखते हैं… कुछ कहना है?”
अनुज घबरा गया।
“नहीं… बस आपकी किताब अच्छी लगी।”
रिया ने किताब उसकी तरफ बढ़ा दी।
“तो पढ़ लीजिए।”
उस दिन से दोनों की दोस्ती शुरू हो गई।
धीरे-धीरे अनुज को रिया की आदत हो गई। सुबह उसका मैसेज, दोपहर की छोटी-सी मुलाकात और शाम को घंटों बातें—सब उसकी जिंदगी का हिस्सा बन गया।
एक दिन अनुज ने हिम्मत करके पूछा—
“रिया, अगर कोई तुम्हें बहुत प्यार करे, तो क्या तुम उसका साथ दोगी?”
रिया ने मुस्कुराकर कहा—
“पहले वो कहे तो सही कि प्यार करता है।”
अनुज चुप हो गया।
रिया ने उसकी आँखों में देखकर कहा—
“कभी-कभी जवाब सुनने के लिए सवाल पूछना ज़रूरी नहीं होता।”
अनुज समझ गया।
लेकिन उसी रात रिया का फोन बंद हो गया।
अगले दिन भी वह कॉलेज नहीं आई।
तीन दिन बाद अनुज को पता चला कि रिया अपने परिवार के साथ दूसरे शहर चली गई है।
अनुज ने उसे बहुत फोन किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
महीने गुजर गए।
एक दिन उसे रिया का संदेश मिला—
“मुझे माफ़ कर देना। मुझे लगा था कि दूर जाना आसान होगा, लेकिन हर दिन तुम्हारी याद आती रही।”
अनुज ने तुरंत जवाब दिया—
“तो वापस आ जाओ।”
कुछ देर बाद सिर्फ़ एक फोटो आई।
रेलवे स्टेशन की।
नीचे लिखा था—
“मैं आ चुकी हूँ… अब तुम्हारी बारी है।”
अनुज भागता हुआ स्टेशन पहुँचा।
प्लेटफॉर्म पर रिया खड़ी थी।
दोनों कुछ सेकंड तक बस एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर रिया ने पूछा—
“अब भी प्यार पर विश्वास नहीं है?”
अनुज मुस्कुराया और उसका हाथ पकड़ लिया।
“प्यार पर नहीं… तुम पर विश्वास है।”
रिया की आँखों में आँसू आ गए।
उस दिन अनुज समझ गया—
कभी-कभी जिंदगी हमें किसी इंसान से इसलिए नहीं मिलाती कि वह हमेशा हमारे साथ रहे… बल्कि इसलिए मिलाती है कि वह हमें प्यार करना सिखा सके। ❤️
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