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एक कप चाय और तुम ❤️
विवान को हर सुबह स्टेशन के पास वाली छोटी-सी चाय की दुकान पर चाय पीने की आदत थी।
एक सोमवार की सुबह उसने देखा कि एक लड़की दुकान के सामने खड़ी होकर बार-बार अपनी घड़ी देख रही थी।
विवान ने पूछा, “किसका इंतज़ार कर रही हैं?”
लड़की ने मुस्कुराकर कहा, “एक ऐसे इंसान का, जो शायद आएगा ही नहीं।”
विवान ने मज़ाक में कहा, “तो तब तक चाय पी लीजिए।”
लड़की ने पहली बार उसे ध्यान से देखा।
“आप रोज़ यहाँ आते हैं?”
“हाँ।”
“फिर कल से मेरी चाय भी आप ही पिलाएँगे।”
विवान हँस पड़ा।
उस लड़की का नाम काव्या था।
अगले दिन काव्या सच में आ गई।
फिर अगले दिन भी।
धीरे-धीरे दोनों की सुबह एक-दूसरे के बिना अधूरी लगने लगी।
काव्या हमेशा कहती, “तुम्हारी चाय बहुत खराब है।”
विवान जवाब देता, “फिर भी रोज़ पीने आती हो।”
काव्या मुस्कुराकर कहती, “चाय के लिए नहीं आती।”
एक दिन विवान ने आखिर पूछ ही लिया—
“तो फिर किसलिए आती हो?”
काव्या कुछ पल चुप रही।
फिर बोली, “तुम्हारे लिए।”
विवान के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
लेकिन अगले ही दिन काव्या नहीं आई।
एक दिन…
दो दिन…
पूरा महीना।
विवान रोज़ उसकी पसंद की अदरक वाली चाय बनवाकर रखता, लेकिन वह नहीं आती।
फिर एक सुबह चाय वाले ने उसे एक छोटा-सा डिब्बा दिया।
“काव्या छोड़ गई थी।”
डिब्बे के अंदर एक छोटी-सी चिट्ठी थी—
“विवान, मुझे अपने परिवार के साथ विदेश जाना पड़ रहा है। शायद बहुत समय तक वापस न आ सकूँ। लेकिन एक बात याद रखना—मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत सुबहें तुम्हारे साथ शुरू हुई थीं।”
विवान ने चिट्ठी सीने से लगा ली।
उसने इंतज़ार करने का फैसला किया।
तीन साल बाद…
एक सुबह वही चाय की दुकान।
विवान हमेशा की तरह अकेला बैठा था।
तभी सामने से आवाज़ आई—
“एक अदरक वाली चाय मिलेगी?”
विवान ने सिर उठाया।
काव्या सामने खड़ी थी।
विवान की आँखों में आँसू आ गए।
“इतने साल लगा दिए?”
काव्या मुस्कुराई।
“चाय ठंडी हो सकती है…”
उसने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।
“…लेकिन प्यार नहीं।”
विवान हँस पड़ा।
चाय वाले ने दोनों के सामने दो कप रख दिए।
और उस दिन पहली बार—
एक कप चाय में दो लोगों की पूरी जिंदगी की खुशी थी। ❤️
विवान को हर सुबह स्टेशन के पास वाली छोटी-सी चाय की दुकान पर चाय पीने की आदत थी।
एक सोमवार की सुबह उसने देखा कि एक लड़की दुकान के सामने खड़ी होकर बार-बार अपनी घड़ी देख रही थी।
विवान ने पूछा, “किसका इंतज़ार कर रही हैं?”
लड़की ने मुस्कुराकर कहा, “एक ऐसे इंसान का, जो शायद आएगा ही नहीं।”
विवान ने मज़ाक में कहा, “तो तब तक चाय पी लीजिए।”
लड़की ने पहली बार उसे ध्यान से देखा।
“आप रोज़ यहाँ आते हैं?”
“हाँ।”
“फिर कल से मेरी चाय भी आप ही पिलाएँगे।”
विवान हँस पड़ा।
उस लड़की का नाम काव्या था।
अगले दिन काव्या सच में आ गई।
फिर अगले दिन भी।
धीरे-धीरे दोनों की सुबह एक-दूसरे के बिना अधूरी लगने लगी।
काव्या हमेशा कहती, “तुम्हारी चाय बहुत खराब है।”
विवान जवाब देता, “फिर भी रोज़ पीने आती हो।”
काव्या मुस्कुराकर कहती, “चाय के लिए नहीं आती।”
एक दिन विवान ने आखिर पूछ ही लिया—
“तो फिर किसलिए आती हो?”
काव्या कुछ पल चुप रही।
फिर बोली, “तुम्हारे लिए।”
विवान के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
लेकिन अगले ही दिन काव्या नहीं आई।
एक दिन…
दो दिन…
पूरा महीना।
विवान रोज़ उसकी पसंद की अदरक वाली चाय बनवाकर रखता, लेकिन वह नहीं आती।
फिर एक सुबह चाय वाले ने उसे एक छोटा-सा डिब्बा दिया।
“काव्या छोड़ गई थी।”
डिब्बे के अंदर एक छोटी-सी चिट्ठी थी—
“विवान, मुझे अपने परिवार के साथ विदेश जाना पड़ रहा है। शायद बहुत समय तक वापस न आ सकूँ। लेकिन एक बात याद रखना—मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत सुबहें तुम्हारे साथ शुरू हुई थीं।”
विवान ने चिट्ठी सीने से लगा ली।
उसने इंतज़ार करने का फैसला किया।
तीन साल बाद…
एक सुबह वही चाय की दुकान।
विवान हमेशा की तरह अकेला बैठा था।
तभी सामने से आवाज़ आई—
“एक अदरक वाली चाय मिलेगी?”
विवान ने सिर उठाया।
काव्या सामने खड़ी थी।
विवान की आँखों में आँसू आ गए।
“इतने साल लगा दिए?”
काव्या मुस्कुराई।
“चाय ठंडी हो सकती है…”
उसने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।
“…लेकिन प्यार नहीं।”
विवान हँस पड़ा।
चाय वाले ने दोनों के सामने दो कप रख दिए।
और उस दिन पहली बार—
एक कप चाय में दो लोगों की पूरी जिंदगी की खुशी थी। ❤️
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