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वो लड़की जो रोज़ मुस्कुराती थी ❤️
समीर की नई नौकरी को अभी सिर्फ़ एक हफ्ता हुआ था। ऑफिस जाते समय वह रोज़ एक फूलों की दुकान के सामने से गुजरता था।
वहाँ एक लड़की बैठती थी।
वह हर ग्राहक को फूल देते समय मुस्कुराती थी।
एक दिन समीर ने पूछा, “आप हमेशा मुस्कुराती रहती हैं?”
लड़की ने कहा, “क्योंकि किसी की सुबह मेरी मुस्कान से अच्छी हो जाए, तो इससे अच्छी बात क्या होगी?”
समीर को उसकी बात दिल में उतर गई।
उस दिन से वह रोज़ उसी दुकान से एक फूल खरीदने लगा।
लड़की का नाम तारा था।
एक दिन समीर ने पूछा, “ये फूल किसके लिए है?”
तारा ने मुस्कुराकर कहा, “आज आपके लिए।”
समीर पहली बार कुछ बोल नहीं पाया।
दिन बीतते गए और दोनों के बीच एक खूबसूरत रिश्ता बन गया।
लेकिन एक सुबह फूलों की दुकान बंद थी।
समीर ने आसपास पूछा।
पता चला कि तारा के पिता का देहांत हो गया था और उसे अपना शहर छोड़ना पड़ा।
समीर के पास उसका कोई नंबर नहीं था।
सिर्फ़ एक पुराना फूल था, जिसे तारा ने जाते समय दुकान के बाहर रख छोड़ा था।
उस फूल के साथ एक छोटी-सी पर्ची थी—
“कुछ लोग जिंदगी में फूलों की तरह आते हैं… थोड़ी देर के लिए, लेकिन उनकी खुशबू हमेशा रहती है।”
समीर ने वह पर्ची संभालकर रख ली।
पाँच साल बीत गए।
एक शाम समीर अपने ऑफिस से निकल रहा था।
सड़क के दूसरी तरफ़ एक नई फूलों की दुकान दिखाई दी।
वह यूँ ही वहाँ चला गया।
दुकान के अंदर एक लड़की फूल सजा रही थी।
समीर ने आवाज़ सुनी—
“किस तरह का फूल चाहिए?”
वह आवाज़ पहचानते ही रुक गया।
“तारा?”
लड़की ने पलटकर देखा।
कुछ पल दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे।
तारा की आँखों में आँसू थे।
“तुमने मुझे पहचाना?”
समीर मुस्कुराया।
“जिस मुस्कान का पाँच साल इंतज़ार किया हो… उसे कैसे भूल सकता हूँ?”
तारा ने एक गुलाब उसकी तरफ बढ़ाया।
“इस बार इसे खरीदना मत।”
“क्यों?”
“क्योंकि इस बार मैं तुम्हारे साथ चलना चाहती हूँ।”
समीर ने गुलाब लिया और उसका हाथ थाम लिया।
कभी-कभी सच्चा प्यार खोता नहीं है…
वह बस सही समय आने तक इंतज़ार करता है। ❤️
समीर की नई नौकरी को अभी सिर्फ़ एक हफ्ता हुआ था। ऑफिस जाते समय वह रोज़ एक फूलों की दुकान के सामने से गुजरता था।
वहाँ एक लड़की बैठती थी।
वह हर ग्राहक को फूल देते समय मुस्कुराती थी।
एक दिन समीर ने पूछा, “आप हमेशा मुस्कुराती रहती हैं?”
लड़की ने कहा, “क्योंकि किसी की सुबह मेरी मुस्कान से अच्छी हो जाए, तो इससे अच्छी बात क्या होगी?”
समीर को उसकी बात दिल में उतर गई।
उस दिन से वह रोज़ उसी दुकान से एक फूल खरीदने लगा।
लड़की का नाम तारा था।
एक दिन समीर ने पूछा, “ये फूल किसके लिए है?”
तारा ने मुस्कुराकर कहा, “आज आपके लिए।”
समीर पहली बार कुछ बोल नहीं पाया।
दिन बीतते गए और दोनों के बीच एक खूबसूरत रिश्ता बन गया।
लेकिन एक सुबह फूलों की दुकान बंद थी।
समीर ने आसपास पूछा।
पता चला कि तारा के पिता का देहांत हो गया था और उसे अपना शहर छोड़ना पड़ा।
समीर के पास उसका कोई नंबर नहीं था।
सिर्फ़ एक पुराना फूल था, जिसे तारा ने जाते समय दुकान के बाहर रख छोड़ा था।
उस फूल के साथ एक छोटी-सी पर्ची थी—
“कुछ लोग जिंदगी में फूलों की तरह आते हैं… थोड़ी देर के लिए, लेकिन उनकी खुशबू हमेशा रहती है।”
समीर ने वह पर्ची संभालकर रख ली।
पाँच साल बीत गए।
एक शाम समीर अपने ऑफिस से निकल रहा था।
सड़क के दूसरी तरफ़ एक नई फूलों की दुकान दिखाई दी।
वह यूँ ही वहाँ चला गया।
दुकान के अंदर एक लड़की फूल सजा रही थी।
समीर ने आवाज़ सुनी—
“किस तरह का फूल चाहिए?”
वह आवाज़ पहचानते ही रुक गया।
“तारा?”
लड़की ने पलटकर देखा।
कुछ पल दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे।
तारा की आँखों में आँसू थे।
“तुमने मुझे पहचाना?”
समीर मुस्कुराया।
“जिस मुस्कान का पाँच साल इंतज़ार किया हो… उसे कैसे भूल सकता हूँ?”
तारा ने एक गुलाब उसकी तरफ बढ़ाया।
“इस बार इसे खरीदना मत।”
“क्यों?”
“क्योंकि इस बार मैं तुम्हारे साथ चलना चाहती हूँ।”
समीर ने गुलाब लिया और उसका हाथ थाम लिया।
कभी-कभी सच्चा प्यार खोता नहीं है…
वह बस सही समय आने तक इंतज़ार करता है। ❤️
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