Post
View post and interactions

Story Maker
तुम्हारी आखिरी आवाज़ ❤️
अमन और साक्षी की मुलाक़ात एक गलत फोन कॉल से हुई थी।
एक रात अमन के फोन पर अनजान नंबर से कॉल आया।
“हैलो… क्या आप मुझे सुन सकते हैं?”
अमन ने कहा, “जी, लेकिन आपने गलत नंबर मिलाया है।”
साक्षी हँस पड़ी।
“ओह, सॉरी!”
कॉल कट गई।
लेकिन अगले दिन उसी नंबर से फिर फोन आया।
“आज भी गलत नंबर?”
अमन ने मज़ाक किया।
साक्षी बोली, “शायद नंबर गलत है… लेकिन इंसान सही मिल गया।”
धीरे-धीरे उनकी बातें लंबी होने लगीं।
हर रात फोन पर घंटों बातें होतीं। उन्होंने एक-दूसरे को कभी देखा तक नहीं था, फिर भी दोनों को लगता था कि वे एक-दूसरे को वर्षों से जानते हैं।
एक रात साक्षी ने पूछा—
“अगर हम कभी मिले ही नहीं तो?”
अमन ने जवाब दिया—
“तो भी मैं तुम्हें अपनी जिंदगी की सबसे खूबसूरत मुलाक़ात मानूँगा।”
कुछ दिनों बाद साक्षी ने कहा—
“कल मैं तुमसे मिलने आ रही हूँ।”
अमन पूरी रात सो नहीं पाया।
अगली सुबह वह तय जगह पर पहुँच गया।
घंटा बीत गया।
साक्षी नहीं आई।
फिर उसका फोन आया।
आवाज़ बहुत धीमी थी।
“अमन…”
“हाँ, कहाँ हो तुम?”
“मैं अस्पताल में हूँ।”
अमन घबरा गया।
“क्या हुआ?”
साक्षी ने कहा, “मुझे एक गंभीर बीमारी है। मैं तुम्हें देखकर तुम्हारी आँखों में अपने लिए दुख नहीं देखना चाहती थी।”
अमन की आँखों में आँसू आ गए।
“तुमने मुझे मिलने से पहले ही छोड़ दिया?”
कुछ सेकंड खामोशी रही।
फिर साक्षी बोली—
“नहीं… मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे मेरी आवाज़ से याद रखो।”
अमन अस्पताल पहुँचा।
पहली बार दोनों आमने-सामने मिले।
साक्षी कमजोर थी, लेकिन उसके चेहरे पर वही मुस्कान थी।
अमन ने उसका हाथ पकड़कर कहा—
“तुम्हारी आवाज़ मुझे जिंदगी भर सुनाई देगी।”
साक्षी ने आँखें बंद करते हुए कहा—
“तो फिर मुझे भूलना मत।”
अमन ने उसका हाथ और कसकर पकड़ लिया।
“तुम्हें भूलना मेरे बस में नहीं।”
उस दिन के बाद अमन हर रात उसी नंबर पर फोन करता रहा।
फोन कभी नहीं उठा।
लेकिन हर बार कॉल खत्म होने से पहले वह एक ही बात कहता—
“साक्षी, आज भी तुम्हारी आवाज़ मेरे पास है।”
और शायद कुछ प्रेम कहानियाँ साथ रहने के लिए नहीं होतीं…
कुछ प्रेम कहानियाँ सिर्फ़ यह सिखाने आती हैं कि किसी को खोने के बाद भी उससे प्यार किया जा सकता है। ❤️
अमन और साक्षी की मुलाक़ात एक गलत फोन कॉल से हुई थी।
एक रात अमन के फोन पर अनजान नंबर से कॉल आया।
“हैलो… क्या आप मुझे सुन सकते हैं?”
अमन ने कहा, “जी, लेकिन आपने गलत नंबर मिलाया है।”
साक्षी हँस पड़ी।
“ओह, सॉरी!”
कॉल कट गई।
लेकिन अगले दिन उसी नंबर से फिर फोन आया।
“आज भी गलत नंबर?”
अमन ने मज़ाक किया।
साक्षी बोली, “शायद नंबर गलत है… लेकिन इंसान सही मिल गया।”
धीरे-धीरे उनकी बातें लंबी होने लगीं।
हर रात फोन पर घंटों बातें होतीं। उन्होंने एक-दूसरे को कभी देखा तक नहीं था, फिर भी दोनों को लगता था कि वे एक-दूसरे को वर्षों से जानते हैं।
एक रात साक्षी ने पूछा—
“अगर हम कभी मिले ही नहीं तो?”
अमन ने जवाब दिया—
“तो भी मैं तुम्हें अपनी जिंदगी की सबसे खूबसूरत मुलाक़ात मानूँगा।”
कुछ दिनों बाद साक्षी ने कहा—
“कल मैं तुमसे मिलने आ रही हूँ।”
अमन पूरी रात सो नहीं पाया।
अगली सुबह वह तय जगह पर पहुँच गया।
घंटा बीत गया।
साक्षी नहीं आई।
फिर उसका फोन आया।
आवाज़ बहुत धीमी थी।
“अमन…”
“हाँ, कहाँ हो तुम?”
“मैं अस्पताल में हूँ।”
अमन घबरा गया।
“क्या हुआ?”
साक्षी ने कहा, “मुझे एक गंभीर बीमारी है। मैं तुम्हें देखकर तुम्हारी आँखों में अपने लिए दुख नहीं देखना चाहती थी।”
अमन की आँखों में आँसू आ गए।
“तुमने मुझे मिलने से पहले ही छोड़ दिया?”
कुछ सेकंड खामोशी रही।
फिर साक्षी बोली—
“नहीं… मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे मेरी आवाज़ से याद रखो।”
अमन अस्पताल पहुँचा।
पहली बार दोनों आमने-सामने मिले।
साक्षी कमजोर थी, लेकिन उसके चेहरे पर वही मुस्कान थी।
अमन ने उसका हाथ पकड़कर कहा—
“तुम्हारी आवाज़ मुझे जिंदगी भर सुनाई देगी।”
साक्षी ने आँखें बंद करते हुए कहा—
“तो फिर मुझे भूलना मत।”
अमन ने उसका हाथ और कसकर पकड़ लिया।
“तुम्हें भूलना मेरे बस में नहीं।”
उस दिन के बाद अमन हर रात उसी नंबर पर फोन करता रहा।
फोन कभी नहीं उठा।
लेकिन हर बार कॉल खत्म होने से पहले वह एक ही बात कहता—
“साक्षी, आज भी तुम्हारी आवाज़ मेरे पास है।”
और शायद कुछ प्रेम कहानियाँ साथ रहने के लिए नहीं होतीं…
कुछ प्रेम कहानियाँ सिर्फ़ यह सिखाने आती हैं कि किसी को खोने के बाद भी उससे प्यार किया जा सकता है। ❤️
0
0

Comments
0No comments yet
Be the first to comment