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बारिश में मिला अजनबी ❤️
शाम के करीब सात बजे थे। शहर में अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गई।
माया ऑफिस से निकली तो उसके पास छाता नहीं था। वह सड़क किनारे खड़ी होकर बारिश रुकने का इंतज़ार करने लगी।
तभी एक लड़का उसके पास आया और अपना छाता उसकी तरफ बढ़ा दिया।
“आप ले लीजिए।”
माया ने पूछा, “और आप?”
लड़का मुस्कुराया।
“मैं बारिश में भीगने का आदी हूँ।”
माया ने छाता ले लिया।
“कम से कम नाम तो बता दीजिए।”
“आर्यन।”
“मैं माया।”
अगले दिन माया उसी जगह आई।
आर्यन वहाँ नहीं था।
तीसरे दिन भी नहीं।
माया को समझ नहीं आया कि वह एक अजनबी के लिए क्यों इंतज़ार कर रही थी।
एक हफ्ते बाद उसी चाय की दुकान पर उसे एक छोटा-सा कागज़ मिला।
उस पर लिखा था—
“जिस लड़की को मैंने छाता दिया था, अगर वह वापस आए तो उसे कहना… मैं भी उसका इंतज़ार कर रहा हूँ।”
नीचे एक पता लिखा था।
माया उसी शाम उस पते पर पहुँची।
वहाँ एक छोटा-सा पुराना घर था।
दरवाज़ा एक बुज़ुर्ग महिला ने खोला।
माया ने आर्यन के बारे में पूछा।
महिला की आँखें नम हो गईं।
“आर्यन मेरा बेटा था।”
माया चौंक गई।
महिला ने बताया कि आर्यन कुछ महीनों से गंभीर बीमारी से लड़ रहा था और इलाज के लिए दूसरे शहर गया था।
“लेकिन जाने से पहले वह रोज़ उसी चाय की दुकान पर जाता था। कहता था कि उसे वहाँ एक लड़की मिली है।”
माया की आँखों में आँसू आ गए।
कुछ हफ्तों बाद आर्यन वापस आया।
वह पहले से बहुत कमजोर था।
माया उसे देखते ही बोली—
“तुमने कहा था बारिश में भीगने के आदी हो।”
आर्यन मुस्कुराया।
“हाँ… लेकिन तुम्हारे बिना बारिश अच्छी नहीं लगती।”
माया ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“तो अब हर बारिश साथ में देखेंगे।”
आर्यन ने उसकी तरफ देखा।
“वादा?”
माया ने मुस्कुराकर कहा—
“वादा।”
उस दिन दोनों उसी चाय की दुकान पर बैठे।
बारिश फिर शुरू हो गई।
लेकिन इस बार उनके पास सिर्फ़ एक छाता था…
और दोनों उसे साझा कर रहे थे।
कभी-कभी जिंदगी किसी अजनबी को अचानक हमारी कहानी में भेज देती है…
और वही अजनबी धीरे-धीरे हमारी पूरी दुनिया बन जाता है। ❤️
शाम के करीब सात बजे थे। शहर में अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गई।
माया ऑफिस से निकली तो उसके पास छाता नहीं था। वह सड़क किनारे खड़ी होकर बारिश रुकने का इंतज़ार करने लगी।
तभी एक लड़का उसके पास आया और अपना छाता उसकी तरफ बढ़ा दिया।
“आप ले लीजिए।”
माया ने पूछा, “और आप?”
लड़का मुस्कुराया।
“मैं बारिश में भीगने का आदी हूँ।”
माया ने छाता ले लिया।
“कम से कम नाम तो बता दीजिए।”
“आर्यन।”
“मैं माया।”
अगले दिन माया उसी जगह आई।
आर्यन वहाँ नहीं था।
तीसरे दिन भी नहीं।
माया को समझ नहीं आया कि वह एक अजनबी के लिए क्यों इंतज़ार कर रही थी।
एक हफ्ते बाद उसी चाय की दुकान पर उसे एक छोटा-सा कागज़ मिला।
उस पर लिखा था—
“जिस लड़की को मैंने छाता दिया था, अगर वह वापस आए तो उसे कहना… मैं भी उसका इंतज़ार कर रहा हूँ।”
नीचे एक पता लिखा था।
माया उसी शाम उस पते पर पहुँची।
वहाँ एक छोटा-सा पुराना घर था।
दरवाज़ा एक बुज़ुर्ग महिला ने खोला।
माया ने आर्यन के बारे में पूछा।
महिला की आँखें नम हो गईं।
“आर्यन मेरा बेटा था।”
माया चौंक गई।
महिला ने बताया कि आर्यन कुछ महीनों से गंभीर बीमारी से लड़ रहा था और इलाज के लिए दूसरे शहर गया था।
“लेकिन जाने से पहले वह रोज़ उसी चाय की दुकान पर जाता था। कहता था कि उसे वहाँ एक लड़की मिली है।”
माया की आँखों में आँसू आ गए।
कुछ हफ्तों बाद आर्यन वापस आया।
वह पहले से बहुत कमजोर था।
माया उसे देखते ही बोली—
“तुमने कहा था बारिश में भीगने के आदी हो।”
आर्यन मुस्कुराया।
“हाँ… लेकिन तुम्हारे बिना बारिश अच्छी नहीं लगती।”
माया ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“तो अब हर बारिश साथ में देखेंगे।”
आर्यन ने उसकी तरफ देखा।
“वादा?”
माया ने मुस्कुराकर कहा—
“वादा।”
उस दिन दोनों उसी चाय की दुकान पर बैठे।
बारिश फिर शुरू हो गई।
लेकिन इस बार उनके पास सिर्फ़ एक छाता था…
और दोनों उसे साझा कर रहे थे।
कभी-कभी जिंदगी किसी अजनबी को अचानक हमारी कहानी में भेज देती है…
और वही अजनबी धीरे-धीरे हमारी पूरी दुनिया बन जाता है। ❤️
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