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Story Maker
एक छतरी, दो दिल ❤️

आदित्य को बारिश बिल्कुल पसंद नहीं थी।

बारिश होते ही वह ऑफिस से सीधे घर जाने की कोशिश करता था।

लेकिन उस दिन बारिश इतनी तेज़ थी कि उसे सड़क किनारे एक बस शेल्टर में रुकना पड़ा।

वहाँ पहले से एक लड़की खड़ी थी।

उसके हाथ में लाल रंग की छतरी थी।

आदित्य ने पूछा, “बस कब आएगी?”

लड़की ने घड़ी देखते हुए कहा, “पता नहीं… लेकिन लगता है बारिश पहले रुक जाएगी।”

आदित्य हँस पड़ा।

“तो फिर आज घर जाना मुश्किल है।”

लड़की मुस्कुराई।

“कभी-कभी देर से घर पहुँचना भी अच्छा होता है।”

उसका नाम इशिता था।

कुछ देर बाद बस आई, लेकिन भीड़ इतनी थी कि दोनों उसमें नहीं चढ़ पाए।

इशिता ने अपनी छतरी खोली।

“आपका घर किस तरफ है?”

आदित्य ने रास्ता बताया।

“मेरा रास्ता भी वही है।”

दोनों एक ही छतरी के नीचे चलने लगे।

रास्ता सिर्फ़ दस मिनट का था, लेकिन उस दिन दोनों ने जिंदगी की सबसे लंबी बातचीत की।

अगले दिन आदित्य जानबूझकर उसी बस शेल्टर पर जल्दी पहुँच गया।

इशिता पहले से वहाँ थी।

“आज फिर बारिश का इंतज़ार?”

आदित्य ने मुस्कुराकर कहा—

“नहीं… तुम्हारा।”

इशिता कुछ नहीं बोली।

बस मुस्कुरा दी।

फिर उनकी मुलाक़ातें रोज़ होने लगीं।

कुछ महीनों बाद आदित्य ने उसे प्रपोज़ किया।

इशिता ने कहा—

“मुझे थोड़ा समय चाहिए।”

अगले दिन उसने आदित्य को एक लाल छतरी दी।

“ये रख लो।”

आदित्य ने पूछा, “क्यों?”

इशिता ने कहा—

“क्योंकि जब तक मैं अपना जवाब नहीं देती, तुम्हें बारिश में अकेले नहीं भीगना चाहिए।”

एक हफ्ते बाद दोनों उसी जगह मिले।

इशिता ने कहा—

“मेरा जवाब है… हाँ।”

आदित्य मुस्कुराया।

“तो अब छतरी वापस?”

इशिता ने सिर हिलाया।

“नहीं। अब ये हम दोनों की है।”

कई साल बाद भी जब बारिश होती, दोनों उसी लाल छतरी को लेकर बाहर निकलते।

एक दिन उनका छोटा बेटा पूछ बैठा—

“मम्मी-पापा, आप दोनों की love story कैसे शुरू हुई?”

इशिता ने आदित्य की तरफ देखा।

आदित्य मुस्कुराया।

“एक बारिश से।”

इशिता ने कहा—

“और एक छतरी से।”

दोनों हँस पड़े।

कभी-कभी जिंदगी की सबसे खूबसूरत शुरुआत किसी बड़ी घटना से नहीं…
बस एक छोटी-सी छतरी के नीचे होती है। ❤️
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