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प्यार का वो वादा ❤️
नमन और राधिका की मुलाकात एक छोटे-से शहर की लाइब्रेरी में हुई थी।
राधिका रोज़ एक ही कोने में बैठकर किताब पढ़ती थी। नमन भी रोज़ वहीं आकर बैठने लगा।
एक दिन राधिका ने पूछा, “तुम किताब पढ़ने आते हो या मुझे देखने?”
नमन हँस पड़ा।
“पहले किताब के लिए आता था… अब वजह बदल गई है।”
राधिका के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई।
लेकिन राधिका के परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी।
उसने नमन से कहा—
“मैं तुम्हें छोड़ना नहीं चाहती, लेकिन अपने परिवार को भी नहीं छोड़ सकती।”
नमन ने उसका हाथ पकड़कर कहा—
“मैं तुमसे तुम्हारा परिवार छीनना नहीं चाहता। मैं बस इतना चाहता हूँ कि एक दिन तुम मुझे अपनी जिंदगी में जगह दे सको।”
राधिका की आँखों में आँसू आ गए।
“अगर वो दिन कभी नहीं आया तो?”
नमन मुस्कुराया।
“तो मैं तुम्हारी खुशी की दुआ करता रहूँगा।”
राधिका की शादी हो गई।
नमन ने उसे कभी परेशान नहीं किया।
साल गुजर गए।
एक दिन नमन को एक पत्र मिला।
वह राधिका का था।
“नमन,
मैंने तुम्हें बहुत साल पहले खो दिया था। लेकिन सच ये है कि मैं तुम्हें कभी भूल नहीं पाई।
मेरी शादी टूट चुकी है। अब मैं अपने फैसले खुद ले सकती हूँ।
अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए अभी भी थोड़ी-सी जगह है, तो कल उसी लाइब्रेरी में मिलना।”
नमन पूरी रात सो नहीं पाया।
अगले दिन वह लाइब्रेरी पहुँचा।
राधिका खिड़की के पास खड़ी थी।
नमन ने पूछा—
“तुम सच में वापस आ गई?”
राधिका की आँखों में आँसू थे।
“मैं कभी गई ही नहीं थी।”
नमन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“इस बार कोई वादा मत करना।”
राधिका ने पूछा, “क्यों?”
नमन मुस्कुराया।
“क्योंकि अब हमें वादे नहीं… साथ चाहिए।”
राधिका ने सिर उसके कंधे पर रख दिया।
बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी।
और उसी पुरानी लाइब्रेरी में, जहाँ उनकी कहानी शुरू हुई थी, उनकी जिंदगी ने एक नई शुरुआत की।
सच्चा प्यार हमेशा पाने की जिद नहीं करता…
कभी-कभी इंतज़ार करता है, जब तक दोनों को साथ चलने का सही समय न मिल जाए। ❤️
नमन और राधिका की मुलाकात एक छोटे-से शहर की लाइब्रेरी में हुई थी।
राधिका रोज़ एक ही कोने में बैठकर किताब पढ़ती थी। नमन भी रोज़ वहीं आकर बैठने लगा।
एक दिन राधिका ने पूछा, “तुम किताब पढ़ने आते हो या मुझे देखने?”
नमन हँस पड़ा।
“पहले किताब के लिए आता था… अब वजह बदल गई है।”
राधिका के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई।
लेकिन राधिका के परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी।
उसने नमन से कहा—
“मैं तुम्हें छोड़ना नहीं चाहती, लेकिन अपने परिवार को भी नहीं छोड़ सकती।”
नमन ने उसका हाथ पकड़कर कहा—
“मैं तुमसे तुम्हारा परिवार छीनना नहीं चाहता। मैं बस इतना चाहता हूँ कि एक दिन तुम मुझे अपनी जिंदगी में जगह दे सको।”
राधिका की आँखों में आँसू आ गए।
“अगर वो दिन कभी नहीं आया तो?”
नमन मुस्कुराया।
“तो मैं तुम्हारी खुशी की दुआ करता रहूँगा।”
राधिका की शादी हो गई।
नमन ने उसे कभी परेशान नहीं किया।
साल गुजर गए।
एक दिन नमन को एक पत्र मिला।
वह राधिका का था।
“नमन,
मैंने तुम्हें बहुत साल पहले खो दिया था। लेकिन सच ये है कि मैं तुम्हें कभी भूल नहीं पाई।
मेरी शादी टूट चुकी है। अब मैं अपने फैसले खुद ले सकती हूँ।
अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए अभी भी थोड़ी-सी जगह है, तो कल उसी लाइब्रेरी में मिलना।”
नमन पूरी रात सो नहीं पाया।
अगले दिन वह लाइब्रेरी पहुँचा।
राधिका खिड़की के पास खड़ी थी।
नमन ने पूछा—
“तुम सच में वापस आ गई?”
राधिका की आँखों में आँसू थे।
“मैं कभी गई ही नहीं थी।”
नमन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“इस बार कोई वादा मत करना।”
राधिका ने पूछा, “क्यों?”
नमन मुस्कुराया।
“क्योंकि अब हमें वादे नहीं… साथ चाहिए।”
राधिका ने सिर उसके कंधे पर रख दिया।
बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी।
और उसी पुरानी लाइब्रेरी में, जहाँ उनकी कहानी शुरू हुई थी, उनकी जिंदगी ने एक नई शुरुआत की।
सच्चा प्यार हमेशा पाने की जिद नहीं करता…
कभी-कभी इंतज़ार करता है, जब तक दोनों को साथ चलने का सही समय न मिल जाए। ❤️
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