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प्रिंस और संध्या की प्रेम कहानी ❤️

एक छोटे-से शहर में प्रिंस नाम का एक लड़का रहता था। वह शांत स्वभाव का था, लेकिन अपने सपनों को लेकर बहुत मेहनती था।

उसी शहर में संध्या रहती थी। वह हँसमुख थी और उसकी मुस्कान देखकर आसपास का माहौल भी खुशनुमा हो जाता था।

दोनों की पहली मुलाकात एक बरसात की शाम हुई।

संध्या बस स्टॉप पर खड़ी थी और उसके पास छाता नहीं था। तभी प्रिंस वहाँ पहुँचा और अपना छाता उसकी तरफ कर दिया।

“आप चाहें तो मेरे साथ चल सकती हैं।”

संध्या ने मुस्कुराकर पूछा—

“और आप?”

प्रिंस ने कहा—

“मैं थोड़ा भीग जाऊँगा, लेकिन आपको भीगने नहीं दूँगा।”

संध्या हँस पड़ी।

उस छोटी-सी मुलाकात के बाद दोनों अक्सर मिलने लगे।

कभी चाय की दुकान पर, कभी पार्क में, तो कभी रास्ते में अचानक।

धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।

एक दिन संध्या ने प्रिंस से पूछा—

“अगर मैं कभी तुमसे बहुत दूर चली गई तो?”

प्रिंस ने उसका हाथ पकड़कर कहा—

“दूरी कितनी भी हो, मेरा इंतज़ार तुम्हारे साथ रहेगा।”

लेकिन जिंदगी ने सच में दोनों के बीच दूरी ला दी।

संध्या के परिवार को दूसरे शहर जाना पड़ा।

जाने से पहले उसने प्रिंस से कहा—

“मुझे नहीं पता हम दोबारा कब मिलेंगे।”

प्रिंस ने मुस्कुराकर कहा—

“जब मिलेंगे, वहीं से कहानी आगे शुरू करेंगे जहाँ आज खत्म कर रहे हैं।”

साल बीत गए।

दोनों अपने-अपने जीवन में व्यस्त हो गए, लेकिन एक-दूसरे को कभी भूल नहीं पाए।

एक दिन प्रिंस उसी पुराने बस स्टॉप पर खड़ा था, जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी।

अचानक पीछे से एक आवाज़ आई—

“अभी भी बारिश में अकेले खड़े रहते हो?”

प्रिंस ने पलटकर देखा।

संध्या सामने खड़ी थी।

उसके हाथ में वही लाल छाता था।

प्रिंस की आँखों में आँसू आ गए।

“तुम वापस आ गई?”

संध्या मुस्कुराई।

“मैंने कहा था ना… कहानी खत्म नहीं हुई है।”

प्रिंस ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।

“तो फिर इस बार कहीं मत जाना।”

संध्या ने कहा—

“अब जाना भी हुआ तो तुम्हारे साथ।”

दोनों मुस्कुराते हुए उसी छाते के नीचे चल पड़े।

बारिश फिर से हो रही थी।

लेकिन इस बार उनके बीच कोई दूरी नहीं थी।

कभी-कभी सच्चा प्यार जिंदगी से दूर हो जाता है, लेकिन दिल से नहीं।
और जब किस्मत दो सच्चे दिलों को फिर मिलाती है, तो अधूरी कहानी भी खूबसूरत अंत पा लेती है। ❤️
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