Post
View post and interactions

Story Maker
आख़िरी आवाज़
सिया रोज़ रात अपनी छोटी बहन को फोन करती थी।
दोनों घंटों बातें करतीं और फिर माँ के डाँटने पर फोन रख देतीं।
एक रात छोटी बहन ने कहा, “दीदी, कल जल्दी फोन करना। आज तुमसे बहुत सारी बातें करनी हैं।”
सिया ने हँसकर कहा, “पक्का।”
अगली सुबह सिया का एक्सीडेंट हो गया।
छोटी बहन को खबर मिली तो वह अस्पताल भागी। सिया होश में नहीं थी।
डॉक्टर ने कहा, “अगर कुछ कहना है, तो अभी कह दीजिए।”
वह सिया का हाथ पकड़कर रोते हुए बोली, “दीदी, कल वाली बातें तो अभी बाकी हैं…”
सिया ने धीरे से आँखें खोलीं, हल्की-सी मुस्कुराई और बस इतना कहा—
“जो बातें बाकी रह गईं… उन्हें संभालकर रखना।”
फिर उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गईं।
उस रात छोटी बहन ने फोन अपने कान से लगाया।
दूसरी तरफ़ कोई आवाज़ नहीं थी।
फिर भी वह धीरे से बोली—
“दीदी… आज मैं जल्दी फोन कर पाई।”
सिया रोज़ रात अपनी छोटी बहन को फोन करती थी।
दोनों घंटों बातें करतीं और फिर माँ के डाँटने पर फोन रख देतीं।
एक रात छोटी बहन ने कहा, “दीदी, कल जल्दी फोन करना। आज तुमसे बहुत सारी बातें करनी हैं।”
सिया ने हँसकर कहा, “पक्का।”
अगली सुबह सिया का एक्सीडेंट हो गया।
छोटी बहन को खबर मिली तो वह अस्पताल भागी। सिया होश में नहीं थी।
डॉक्टर ने कहा, “अगर कुछ कहना है, तो अभी कह दीजिए।”
वह सिया का हाथ पकड़कर रोते हुए बोली, “दीदी, कल वाली बातें तो अभी बाकी हैं…”
सिया ने धीरे से आँखें खोलीं, हल्की-सी मुस्कुराई और बस इतना कहा—
“जो बातें बाकी रह गईं… उन्हें संभालकर रखना।”
फिर उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गईं।
उस रात छोटी बहन ने फोन अपने कान से लगाया।
दूसरी तरफ़ कोई आवाज़ नहीं थी।
फिर भी वह धीरे से बोली—
“दीदी… आज मैं जल्दी फोन कर पाई।”
0
0

Comments
0No comments yet
Be the first to comment