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आख़िरी खिलौना
एक छोटा बच्चा रोज़ खिलौनों की दुकान के बाहर खड़ा होकर एक लाल कार को देखा करता था।
दुकानदार ने एक दिन पूछा, “बेटा, खरीदते क्यों नहीं?”
बच्चे ने जेब से सिक्के निकालकर कहा, “पैसे कम हैं… लेकिन मैं रोज़ थोड़ा-थोड़ा बचा रहा हूँ।”
दुकानदार मुस्कुराया, “किसके लिए चाहिए?”
बच्चे ने कहा, “अपने छोटे भाई के लिए। उसे लाल रंग बहुत पसंद है।”
कई दिनों बाद बच्चे ने पैसे पूरे कर लिए।
वह खुशी-खुशी दुकान पहुँचा और बोला, “अंकल, कार दे दीजिए।”
दुकानदार ने कार उसके हाथ में रख दी।
बच्चे ने उसे सीने से लगाया और बोला, “अब इसे भाई की कब्र पर रख दूँगा… उसे लाल कार बहुत पसंद थी।”
दुकानदार की आँखों में आँसू आ गए।
बच्चा बाहर चला गया।
दुकानदार ने पहली बार महसूस किया—
कुछ बच्चे खिलौने खेलने के लिए नहीं, यादें बचाने के लिए खरीदते हैं।
एक छोटा बच्चा रोज़ खिलौनों की दुकान के बाहर खड़ा होकर एक लाल कार को देखा करता था।
दुकानदार ने एक दिन पूछा, “बेटा, खरीदते क्यों नहीं?”
बच्चे ने जेब से सिक्के निकालकर कहा, “पैसे कम हैं… लेकिन मैं रोज़ थोड़ा-थोड़ा बचा रहा हूँ।”
दुकानदार मुस्कुराया, “किसके लिए चाहिए?”
बच्चे ने कहा, “अपने छोटे भाई के लिए। उसे लाल रंग बहुत पसंद है।”
कई दिनों बाद बच्चे ने पैसे पूरे कर लिए।
वह खुशी-खुशी दुकान पहुँचा और बोला, “अंकल, कार दे दीजिए।”
दुकानदार ने कार उसके हाथ में रख दी।
बच्चे ने उसे सीने से लगाया और बोला, “अब इसे भाई की कब्र पर रख दूँगा… उसे लाल कार बहुत पसंद थी।”
दुकानदार की आँखों में आँसू आ गए।
बच्चा बाहर चला गया।
दुकानदार ने पहली बार महसूस किया—
कुछ बच्चे खिलौने खेलने के लिए नहीं, यादें बचाने के लिए खरीदते हैं।
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