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मदर टेरेसा की प्रेरणादायक कहानी
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे में हुआ था, जो उस समय ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। उनका जन्म नाम एग्नेस गोंझा बोयाज्यू था। कम उम्र से ही उनके मन में जरूरतमंद लोगों की सेवा करने की भावना थी।
1929 में वे भारत आईं और कोलकाता में रहकर लोगों की सेवा करने लगीं। उन्होंने गरीब, बीमार और बेसहारा लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
1950 में उन्होंने Missionaries of Charity की स्थापना की। इस संस्था ने जरूरतमंद लोगों के लिए आश्रय, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य सेवाओं का काम शुरू किया और बाद में कई देशों तक इसका विस्तार हुआ।
मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने भी उन्हें 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया।
उनका निधन 5 सितंबर 1997 को कोलकाता में हुआ। उनके सेवा कार्यों को दुनिया भर में पहचान मिली, हालांकि उनके काम और कुछ विचारों को लेकर आलोचनाएं भी हुई हैं।
सीख: मदर टेरेसा की कहानी बताती है कि दूसरों की मदद करना और जरूरतमंद लोगों के लिए समय तथा संसाधन समर्पित करना भी जीवन को सार्थक बनाने का एक बड़ा रास्ता हो सकता है।
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे में हुआ था, जो उस समय ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। उनका जन्म नाम एग्नेस गोंझा बोयाज्यू था। कम उम्र से ही उनके मन में जरूरतमंद लोगों की सेवा करने की भावना थी।
1929 में वे भारत आईं और कोलकाता में रहकर लोगों की सेवा करने लगीं। उन्होंने गरीब, बीमार और बेसहारा लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
1950 में उन्होंने Missionaries of Charity की स्थापना की। इस संस्था ने जरूरतमंद लोगों के लिए आश्रय, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य सेवाओं का काम शुरू किया और बाद में कई देशों तक इसका विस्तार हुआ।
मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने भी उन्हें 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया।
उनका निधन 5 सितंबर 1997 को कोलकाता में हुआ। उनके सेवा कार्यों को दुनिया भर में पहचान मिली, हालांकि उनके काम और कुछ विचारों को लेकर आलोचनाएं भी हुई हैं।
सीख: मदर टेरेसा की कहानी बताती है कि दूसरों की मदद करना और जरूरतमंद लोगों के लिए समय तथा संसाधन समर्पित करना भी जीवन को सार्थक बनाने का एक बड़ा रास्ता हो सकता है।

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