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नीरज चोपड़ा की प्रेरणादायक कहानी
नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव में हुआ था। बचपन में उनका वजन काफी अधिक था, इसलिए परिवार ने उन्हें खेल और फिटनेस की ओर प्रोत्साहित किया। इसी दौरान उनकी रुचि भाला फेंक यानी जैवलिन थ्रो में विकसित हुई।
उन्होंने कम उम्र में ही जैवलिन की ट्रेनिंग शुरू की और लगातार अभ्यास करके राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की। 2016 में उन्होंने IAAF World U20 Championships में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
2021 में टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने 87.58 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। वे ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बने।
इसके बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी और विश्व चैंपियनशिप तथा एशियाई खेलों सहित कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत के लिए पदक जीते।
सीख: नीरज चोपड़ा की कहानी बताती है कि सही दिशा, अनुशासन और लगातार अभ्यास से साधारण शुरुआत करने वाला व्यक्ति भी दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर देश का नाम रोशन कर सकता है।
नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव में हुआ था। बचपन में उनका वजन काफी अधिक था, इसलिए परिवार ने उन्हें खेल और फिटनेस की ओर प्रोत्साहित किया। इसी दौरान उनकी रुचि भाला फेंक यानी जैवलिन थ्रो में विकसित हुई।
उन्होंने कम उम्र में ही जैवलिन की ट्रेनिंग शुरू की और लगातार अभ्यास करके राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की। 2016 में उन्होंने IAAF World U20 Championships में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
2021 में टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने 87.58 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। वे ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बने।
इसके बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी और विश्व चैंपियनशिप तथा एशियाई खेलों सहित कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत के लिए पदक जीते।
सीख: नीरज चोपड़ा की कहानी बताती है कि सही दिशा, अनुशासन और लगातार अभ्यास से साधारण शुरुआत करने वाला व्यक्ति भी दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर देश का नाम रोशन कर सकता है।

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