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मैरी कॉम की प्रेरणादायक कहानी
मैरी कॉम का जन्म 24 नवंबर 1982 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हुआ था। उनका परिवार साधारण किसान परिवार था और बचपन से ही उन्हें मेहनत की आदत थी। बॉक्सर डिंग्को सिंह की सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने बॉक्सिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
शुरुआत में उन्होंने अपने परिवार से बॉक्सिंग की ट्रेनिंग छिपाई, क्योंकि उन्हें डर था कि परिवार इस खेल को लेकर चिंतित होगा। लेकिन उनकी प्रतिभा और मेहनत ने जल्द ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
मैरी कॉम ने विश्व चैंपियनशिप में कई स्वर्ण पदक जीते और अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग में भारत का नाम रोशन किया। 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा।
उन्होंने शादी और मातृत्व के बाद भी खेल में वापसी की और अपने प्रदर्शन से साबित किया कि पारिवारिक जिम्मेदारियां सपनों के रास्ते में हमेशा बाधा नहीं बनतीं।
सीख: मैरी कॉम की कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और जिम्मेदारियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और मेहनत से अपने सपनों को हासिल किया जा सकता है।
मैरी कॉम का जन्म 24 नवंबर 1982 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हुआ था। उनका परिवार साधारण किसान परिवार था और बचपन से ही उन्हें मेहनत की आदत थी। बॉक्सर डिंग्को सिंह की सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने बॉक्सिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
शुरुआत में उन्होंने अपने परिवार से बॉक्सिंग की ट्रेनिंग छिपाई, क्योंकि उन्हें डर था कि परिवार इस खेल को लेकर चिंतित होगा। लेकिन उनकी प्रतिभा और मेहनत ने जल्द ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
मैरी कॉम ने विश्व चैंपियनशिप में कई स्वर्ण पदक जीते और अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग में भारत का नाम रोशन किया। 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा।
उन्होंने शादी और मातृत्व के बाद भी खेल में वापसी की और अपने प्रदर्शन से साबित किया कि पारिवारिक जिम्मेदारियां सपनों के रास्ते में हमेशा बाधा नहीं बनतीं।
सीख: मैरी कॉम की कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और जिम्मेदारियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और मेहनत से अपने सपनों को हासिल किया जा सकता है।

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