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वर्गीज कुरियन की प्रेरणादायक कहानी
वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 को कोझिकोड, केरल में हुआ था। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में विदेश में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनका करियर शुरुआत में डेयरी उद्योग से जुड़ा नहीं था।
भारत लौटने के बाद उन्हें गुजरात के आनंद में सरकारी डेयरी परियोजना के साथ काम करने का अवसर मिला। वहां उन्होंने किसानों की समस्याओं को करीब से समझा और महसूस किया कि दूध उत्पादकों को बेहतर व्यवस्था और उचित मूल्य की जरूरत है।
उन्होंने किसानों के सहकारी मॉडल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी आंदोलन से Kaira District Co-operative Milk Producers' Union और आगे चलकर Amul के विस्तार को नई दिशा मिली।
कुरियन के नेतृत्व में भारत में दूध उत्पादन और डेयरी सहकारी व्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिला। इसी व्यापक प्रयास को “श्वेत क्रांति” यानी White Revolution के नाम से जाना गया।
उन्हें 1965 में पद्म श्री, 1966 में पद्म भूषण और 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
सीख: वर्गीज कुरियन की कहानी बताती है कि किसी देश की बड़ी समस्या का समाधान केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि लोगों को संगठित करके और उन्हें अपने विकास में भागीदार बनाकर भी किया जा सकता है।
वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 को कोझिकोड, केरल में हुआ था। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में विदेश में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनका करियर शुरुआत में डेयरी उद्योग से जुड़ा नहीं था।
भारत लौटने के बाद उन्हें गुजरात के आनंद में सरकारी डेयरी परियोजना के साथ काम करने का अवसर मिला। वहां उन्होंने किसानों की समस्याओं को करीब से समझा और महसूस किया कि दूध उत्पादकों को बेहतर व्यवस्था और उचित मूल्य की जरूरत है।
उन्होंने किसानों के सहकारी मॉडल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी आंदोलन से Kaira District Co-operative Milk Producers' Union और आगे चलकर Amul के विस्तार को नई दिशा मिली।
कुरियन के नेतृत्व में भारत में दूध उत्पादन और डेयरी सहकारी व्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिला। इसी व्यापक प्रयास को “श्वेत क्रांति” यानी White Revolution के नाम से जाना गया।
उन्हें 1965 में पद्म श्री, 1966 में पद्म भूषण और 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
सीख: वर्गीज कुरियन की कहानी बताती है कि किसी देश की बड़ी समस्या का समाधान केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि लोगों को संगठित करके और उन्हें अपने विकास में भागीदार बनाकर भी किया जा सकता है।

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