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लिएंडर पेस की प्रेरणादायक कहानी
लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को गोवा में हुआ था और उनका पालन-पोषण कोलकाता में हुआ। उनके पिता वेस पेस हॉकी खिलाड़ी थे और उनकी मां जेनिफर बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं। खेल उनके परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
लिएंडर ने कम उम्र में टेनिस को अपना करियर बनाने का फैसला किया और प्रशिक्षण के लिए चेन्नई की ब्रिटानिया अमृतराज टेनिस अकादमी से जुड़े।
1990 में उन्होंने विंबलडन जूनियर खिताब जीता और जूनियर विश्व नंबर 1 बने। 1996 के अटलांटा ओलंपिक में उन्होंने पुरुष एकल में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। वे स्वतंत्र भारत के लिए व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाले प्रमुख भारतीय टेनिस खिलाड़ियों में शामिल हुए।
डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में उन्होंने शानदार सफलता हासिल की और कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीते। उन्होंने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
लिएंडर पेस का करियर खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने कई पीढ़ियों के खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए लंबे समय तक अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखी।
सीख: लिएंडर पेस की कहानी बताती है कि लंबे करियर के लिए प्रतिभा के साथ फिटनेस, अनुशासन, मानसिक मजबूती और लगातार खुद को बेहतर बनाने की इच्छा जरूरी है।
लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को गोवा में हुआ था और उनका पालन-पोषण कोलकाता में हुआ। उनके पिता वेस पेस हॉकी खिलाड़ी थे और उनकी मां जेनिफर बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं। खेल उनके परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
लिएंडर ने कम उम्र में टेनिस को अपना करियर बनाने का फैसला किया और प्रशिक्षण के लिए चेन्नई की ब्रिटानिया अमृतराज टेनिस अकादमी से जुड़े।
1990 में उन्होंने विंबलडन जूनियर खिताब जीता और जूनियर विश्व नंबर 1 बने। 1996 के अटलांटा ओलंपिक में उन्होंने पुरुष एकल में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। वे स्वतंत्र भारत के लिए व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाले प्रमुख भारतीय टेनिस खिलाड़ियों में शामिल हुए।
डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में उन्होंने शानदार सफलता हासिल की और कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीते। उन्होंने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
लिएंडर पेस का करियर खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने कई पीढ़ियों के खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए लंबे समय तक अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखी।
सीख: लिएंडर पेस की कहानी बताती है कि लंबे करियर के लिए प्रतिभा के साथ फिटनेस, अनुशासन, मानसिक मजबूती और लगातार खुद को बेहतर बनाने की इच्छा जरूरी है।

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