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भूपेन हजारिका की प्रेरणादायक कहानी
भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को असम के सादिया में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत और साहित्य में गहरी रुचि थी। उन्होंने बहुत कम उम्र में गीत लिखना और गाना शुरू कर दिया था।
उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका के Columbia University से शिक्षा प्राप्त की। वहां उन्होंने जनसंचार और शिक्षा से जुड़े विषयों पर भी अध्ययन किया।
भारत लौटने के बाद उन्होंने संगीत, फिल्म और साहित्य के क्षेत्र में व्यापक काम किया। उन्होंने असमिया संगीत को देश और विदेश में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके गीतों में सामाजिक समानता, मानवता और आम लोगों की जिंदगी की झलक दिखाई देती थी। उन्होंने हिंदी और बंगाली सहित कई भाषाओं में भी काम किया।
भूपेन हजारिका को पद्म श्री, पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और भारत रत्न सहित कई बड़े सम्मान मिले।
5 नवंबर 2011 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके गीत और विचार आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
सीख: भूपेन हजारिका की कहानी बताती है कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होती। एक कलाकार अपनी आवाज और रचनाओं के माध्यम से समाज में जागरूकता और मानवता का संदेश भी पहुंचा सकता है।
भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को असम के सादिया में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत और साहित्य में गहरी रुचि थी। उन्होंने बहुत कम उम्र में गीत लिखना और गाना शुरू कर दिया था।
उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका के Columbia University से शिक्षा प्राप्त की। वहां उन्होंने जनसंचार और शिक्षा से जुड़े विषयों पर भी अध्ययन किया।
भारत लौटने के बाद उन्होंने संगीत, फिल्म और साहित्य के क्षेत्र में व्यापक काम किया। उन्होंने असमिया संगीत को देश और विदेश में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके गीतों में सामाजिक समानता, मानवता और आम लोगों की जिंदगी की झलक दिखाई देती थी। उन्होंने हिंदी और बंगाली सहित कई भाषाओं में भी काम किया।
भूपेन हजारिका को पद्म श्री, पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और भारत रत्न सहित कई बड़े सम्मान मिले।
5 नवंबर 2011 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके गीत और विचार आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
सीख: भूपेन हजारिका की कहानी बताती है कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होती। एक कलाकार अपनी आवाज और रचनाओं के माध्यम से समाज में जागरूकता और मानवता का संदेश भी पहुंचा सकता है।

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