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एम. विश्वेश्वरैया की प्रेरणादायक कहानी
मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्देनहल्ली में हुआ था। वे भारत के महान इंजीनियरों और प्रशासकों में से एक थे।
उन्होंने पुणे के College of Science से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग में इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया।
उन्होंने भारत में सिंचाई, जल प्रबंधन और बांध निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान दिया। उनकी तकनीकी सोच और प्रशासनिक क्षमता के कारण उन्हें मैसूर राज्य का दीवान नियुक्त किया गया।
उनके कार्यकाल में शिक्षा, उद्योग, बैंकिंग, सिंचाई और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने मैसूर को आधुनिक बनाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी मेहनत और अनुशासन के कारण वे पूरे देश में सम्मानित हुए। भारत सरकार ने उन्हें 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया।
वे लंबे जीवन तक सक्रिय रहे और अपने काम के प्रति अनुशासन के लिए प्रसिद्ध थे। 14 अप्रैल 1962 को उनका निधन हुआ।
सीख: विश्वेश्वरैया की कहानी बताती है कि तकनीकी ज्ञान के साथ ईमानदारी, अनुशासन और दूरदृष्टि जुड़ जाए तो एक व्यक्ति पूरे समाज और देश के विकास में बड़ा योगदान दे सकता है।
मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्देनहल्ली में हुआ था। वे भारत के महान इंजीनियरों और प्रशासकों में से एक थे।
उन्होंने पुणे के College of Science से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग में इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया।
उन्होंने भारत में सिंचाई, जल प्रबंधन और बांध निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान दिया। उनकी तकनीकी सोच और प्रशासनिक क्षमता के कारण उन्हें मैसूर राज्य का दीवान नियुक्त किया गया।
उनके कार्यकाल में शिक्षा, उद्योग, बैंकिंग, सिंचाई और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने मैसूर को आधुनिक बनाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी मेहनत और अनुशासन के कारण वे पूरे देश में सम्मानित हुए। भारत सरकार ने उन्हें 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया।
वे लंबे जीवन तक सक्रिय रहे और अपने काम के प्रति अनुशासन के लिए प्रसिद्ध थे। 14 अप्रैल 1962 को उनका निधन हुआ।
सीख: विश्वेश्वरैया की कहानी बताती है कि तकनीकी ज्ञान के साथ ईमानदारी, अनुशासन और दूरदृष्टि जुड़ जाए तो एक व्यक्ति पूरे समाज और देश के विकास में बड़ा योगदान दे सकता है।

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