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इला भट्ट की प्रेरणादायक कहानी
इला भट्ट का जन्म 7 सितंबर 1933 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और आगे चलकर महिलाओं के अधिकार तथा आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करना शुरू किया।
अपने काम के दौरान उन्होंने देखा कि बड़ी संख्या में महिलाएं असंगठित क्षेत्र में काम करती हैं, लेकिन उन्हें उचित मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और अपने काम के लिए सम्मान नहीं मिलता।
1972 में उन्होंने Self-Employed Women's Association (SEWA) की स्थापना की। इसका उद्देश्य गरीब और स्वरोजगार करने वाली महिलाओं को संगठित करके उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था।
SEWA के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण, बीमा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे यह आंदोलन भारत के बाहर भी चर्चा का विषय बना।
इला भट्ट ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और गरिमा के लिए काम करते हुए बिताया। उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, पद्म भूषण और कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।
2 नवंबर 2022 को उनका निधन हुआ, लेकिन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की उनकी सोच आज भी अनेक संगठनों को प्रेरित करती है।
सीख: इला भट्ट की कहानी बताती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल बड़ी शक्ति या पैसा जरूरी नहीं। लोगों को संगठित करके उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना भी परिवर्तन का एक शक्तिशाली तरीका है।
इला भट्ट का जन्म 7 सितंबर 1933 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और आगे चलकर महिलाओं के अधिकार तथा आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करना शुरू किया।
अपने काम के दौरान उन्होंने देखा कि बड़ी संख्या में महिलाएं असंगठित क्षेत्र में काम करती हैं, लेकिन उन्हें उचित मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और अपने काम के लिए सम्मान नहीं मिलता।
1972 में उन्होंने Self-Employed Women's Association (SEWA) की स्थापना की। इसका उद्देश्य गरीब और स्वरोजगार करने वाली महिलाओं को संगठित करके उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था।
SEWA के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण, बीमा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे यह आंदोलन भारत के बाहर भी चर्चा का विषय बना।
इला भट्ट ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और गरिमा के लिए काम करते हुए बिताया। उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, पद्म भूषण और कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।
2 नवंबर 2022 को उनका निधन हुआ, लेकिन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की उनकी सोच आज भी अनेक संगठनों को प्रेरित करती है।
सीख: इला भट्ट की कहानी बताती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल बड़ी शक्ति या पैसा जरूरी नहीं। लोगों को संगठित करके उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना भी परिवर्तन का एक शक्तिशाली तरीका है।

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