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दशरथ मांझी की प्रेरणादायक कहानी
दशरथ मांझी बिहार के एक साधारण मजदूर थे। उनके गाँव और शहर के बीच एक विशाल पहाड़ रास्ते में बाधा बनता था। अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद उन्होंने तय किया कि गाँव के लोगों को भविष्य में ऐसी परेशानी न हो।
उन्होंने अकेले हथौड़े और छेनी से पहाड़ काटना शुरू कर दिया। करीब 22 वर्षों तक उन्होंने लगातार मेहनत की और पहाड़ के बीच से रास्ता बना दिया।
उनके पास बड़ी मशीनें नहीं थीं, पैसा नहीं था और साथ देने वाला भी कोई नहीं था। लेकिन उनके हौसले ने असंभव लगने वाले काम को संभव कर दिखाया।
सीख: अगर जुनून सच्चा हो और मेहनत लगातार हो, तो एक अकेला इंसान भी पहाड़ को रास्ते में बदल सकता है।
दशरथ मांझी बिहार के एक साधारण मजदूर थे। उनके गाँव और शहर के बीच एक विशाल पहाड़ रास्ते में बाधा बनता था। अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद उन्होंने तय किया कि गाँव के लोगों को भविष्य में ऐसी परेशानी न हो।
उन्होंने अकेले हथौड़े और छेनी से पहाड़ काटना शुरू कर दिया। करीब 22 वर्षों तक उन्होंने लगातार मेहनत की और पहाड़ के बीच से रास्ता बना दिया।
उनके पास बड़ी मशीनें नहीं थीं, पैसा नहीं था और साथ देने वाला भी कोई नहीं था। लेकिन उनके हौसले ने असंभव लगने वाले काम को संभव कर दिखाया।
सीख: अगर जुनून सच्चा हो और मेहनत लगातार हो, तो एक अकेला इंसान भी पहाड़ को रास्ते में बदल सकता है।

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