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राकेश शर्मा की प्रेरणादायक कहानी
राकेश शर्मा का सपना था कि वे आसमान से भी आगे जाएँ। भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में सेवा करने के बाद उनकी मेहनत और क्षमता ने उन्हें अंतरिक्ष तक पहुँचने का अवसर दिया।
1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय नागरिक बने। उन्होंने सोवियत अंतरिक्ष यान सोयुज़ टी-11 से अंतरिक्ष की यात्रा की और लगभग आठ दिन अंतरिक्ष में बिताए।
जब उनसे पूछा गया कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखाई देता है, तो उन्होंने प्रसिद्ध शब्दों में जवाब दिया—“सारे जहाँ से अच्छा।”
उनकी उपलब्धि ने भारत के लाखों युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।
सीख: अपने सपनों की ऊँचाई तय करते समय अपनी वर्तमान परिस्थितियों को सीमा मत बनाइए।
राकेश शर्मा का सपना था कि वे आसमान से भी आगे जाएँ। भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में सेवा करने के बाद उनकी मेहनत और क्षमता ने उन्हें अंतरिक्ष तक पहुँचने का अवसर दिया।
1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय नागरिक बने। उन्होंने सोवियत अंतरिक्ष यान सोयुज़ टी-11 से अंतरिक्ष की यात्रा की और लगभग आठ दिन अंतरिक्ष में बिताए।
जब उनसे पूछा गया कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखाई देता है, तो उन्होंने प्रसिद्ध शब्दों में जवाब दिया—“सारे जहाँ से अच्छा।”
उनकी उपलब्धि ने भारत के लाखों युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।
सीख: अपने सपनों की ऊँचाई तय करते समय अपनी वर्तमान परिस्थितियों को सीमा मत बनाइए।

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