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नीरजा भनोट: साहस और मानवता की अमर कहानी
नीरजा भनोट एक युवा भारतीय फ्लाइट अटेंडेंट थीं, जिनका जीवन बेहद साहस और मानवता की मिसाल बन गया।
1986 में पैन एम फ्लाइट 73 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया। विमान में सैकड़ों यात्री मौजूद थे। बेहद खतरनाक स्थिति के बावजूद नीरजा ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए असाधारण साहस दिखाया।
उन्होंने विमान के आपातकालीन दरवाजे खोलने में मदद की और कई यात्रियों को बाहर निकलने का अवसर मिला। अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने बच्चों और अन्य यात्रियों की मदद की।
नीरजा ने अपनी अंतिम सांस तक दूसरों की जान बचाने की कोशिश की। उनके साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
सीख: असली बहादुरी डर का न होना नहीं है, बल्कि डर के बावजूद सही काम करने का साहस रखना है।
नीरजा भनोट एक युवा भारतीय फ्लाइट अटेंडेंट थीं, जिनका जीवन बेहद साहस और मानवता की मिसाल बन गया।
1986 में पैन एम फ्लाइट 73 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया। विमान में सैकड़ों यात्री मौजूद थे। बेहद खतरनाक स्थिति के बावजूद नीरजा ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए असाधारण साहस दिखाया।
उन्होंने विमान के आपातकालीन दरवाजे खोलने में मदद की और कई यात्रियों को बाहर निकलने का अवसर मिला। अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने बच्चों और अन्य यात्रियों की मदद की।
नीरजा ने अपनी अंतिम सांस तक दूसरों की जान बचाने की कोशिश की। उनके साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
सीख: असली बहादुरी डर का न होना नहीं है, बल्कि डर के बावजूद सही काम करने का साहस रखना है।

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