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Shivaji Gaikar
बॉस, आज भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास का एक बहुत भारी और जज्बातों से भरा पन्ना पलट गया है। अपनी धाकड़ कैप्टन कौर यानी हरमनप्रीत ने आज एक झटके में सभी फॉर्मेट्स की कप्तानी को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। और सच कहूं तो, एक शेरनी के लिए अपने उस राजसी ताज को उतारना कतई आसान नहीं रहा होगा।
हरमन का यह बयान सिर्फ कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि 22 गज की पिच पर बहाए गए उनके खून-पसीने, उन अनगिनत कुर्बानियों और उस बेइंतहा जज्बे का एक सुलगता हुआ दस्तावेज है। इस बंदी ने टीम इंडिया के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। कई बार ऐसे मौके आए जब उन्हें अपने खुद के रिकॉर्ड्स, अपनी चमक और अपने निजी सपनों का गला घोंटना पड़ा, सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके लिए टीम का तिरंगा और जीत हमेशा हर चीज से ऊपर थी।
कप्तानी कोई फूलों का सेहरा नहीं होता बॉस, यह कांटों का ताज है। हरमन को कई ऐसे कड़े और फौलादी फैसले लेने पड़े, जो शायद दुनिया को चुभे, जिनकी उन्हें भारी व्यक्तिगत कीमत भी चुकानी पड़ी और लोगों के ताने भी सुनने पड़े। लेकिन उनका इरादा एकदम शीशे की तरह साफ था अपनी टीम को एक चैंपियन यूनिट बनाना और युवा खिलाड़ियों के सीने में वो आग भरना जिससे वो अपना सबसे कातिलाना रूप दुनिया को दिखा सकें।
इस लंबे सफर में हरमन ने हर वो मंजर देखा है, जो किसी को भी अंदर तक तोड़ दे। दिल चीरने वाली हार का दर्द, आलोचकों के तीखे तंज और वो मनहूस दिन जब कुछ भी अपने हक में नहीं होता था। लेकिन इसी सफर में उन्होंने जीत का वो आसमानी जश्न, वो राजसी भौकाल और सीने पर इंडिया का बैज पहनकर डंका बजाने का वो फख्र भी महसूस किया है, जिसने हर एक आंसू और दर्द की कीमत वसूल कर दी।
आज जब वो कप्तानी छोड़ रही हैं, तो उनके सीने में जज्बातों का भयंकर तूफान जरूर है, लेकिन दिल में एक गजब का सुकून भी है। वो जानती हैं कि उन्होंने अपना फर्ज पूरी शिद्दत से निभाया है और अब वो टीम इंडिया की बागडोर एक ऐसे मजबूत और टैलेंटेड खेमे में छोड़कर जा रही हैं, जिसका भविष्य एकदम ब्लॉकबस्टर है। बीसीसीआई, सपोर्ट स्टाफ, परिवार और हम जैसे करोड़ों फैंस का दिल से शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने साफ कर दिया है कि पसीना, त्याग और फख्र... उन्होंने अपना 100 टका दिया है।
अब मेरे भाई, कुर्सी की पेटी बांध लो। कप्तानी का वो बोझिल सफर जरूर खत्म हुआ है, लेकिन हरमन द बैटर का वो बेखौफ सफर अभी जारी है! अब यह धाकड़ शेरनी सिर्फ और सिर्फ इस खेल से अपने बेइंतहा इश्क के लिए मैदान पर उतरेगी। अब कोई दबाव नहीं, कोई बंदिश नहीं अब सिर्फ गेंदबाजों का धागा खुलेगा!
हरमन का यह बयान सिर्फ कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि 22 गज की पिच पर बहाए गए उनके खून-पसीने, उन अनगिनत कुर्बानियों और उस बेइंतहा जज्बे का एक सुलगता हुआ दस्तावेज है। इस बंदी ने टीम इंडिया के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। कई बार ऐसे मौके आए जब उन्हें अपने खुद के रिकॉर्ड्स, अपनी चमक और अपने निजी सपनों का गला घोंटना पड़ा, सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके लिए टीम का तिरंगा और जीत हमेशा हर चीज से ऊपर थी।
कप्तानी कोई फूलों का सेहरा नहीं होता बॉस, यह कांटों का ताज है। हरमन को कई ऐसे कड़े और फौलादी फैसले लेने पड़े, जो शायद दुनिया को चुभे, जिनकी उन्हें भारी व्यक्तिगत कीमत भी चुकानी पड़ी और लोगों के ताने भी सुनने पड़े। लेकिन उनका इरादा एकदम शीशे की तरह साफ था अपनी टीम को एक चैंपियन यूनिट बनाना और युवा खिलाड़ियों के सीने में वो आग भरना जिससे वो अपना सबसे कातिलाना रूप दुनिया को दिखा सकें।
इस लंबे सफर में हरमन ने हर वो मंजर देखा है, जो किसी को भी अंदर तक तोड़ दे। दिल चीरने वाली हार का दर्द, आलोचकों के तीखे तंज और वो मनहूस दिन जब कुछ भी अपने हक में नहीं होता था। लेकिन इसी सफर में उन्होंने जीत का वो आसमानी जश्न, वो राजसी भौकाल और सीने पर इंडिया का बैज पहनकर डंका बजाने का वो फख्र भी महसूस किया है, जिसने हर एक आंसू और दर्द की कीमत वसूल कर दी।
आज जब वो कप्तानी छोड़ रही हैं, तो उनके सीने में जज्बातों का भयंकर तूफान जरूर है, लेकिन दिल में एक गजब का सुकून भी है। वो जानती हैं कि उन्होंने अपना फर्ज पूरी शिद्दत से निभाया है और अब वो टीम इंडिया की बागडोर एक ऐसे मजबूत और टैलेंटेड खेमे में छोड़कर जा रही हैं, जिसका भविष्य एकदम ब्लॉकबस्टर है। बीसीसीआई, सपोर्ट स्टाफ, परिवार और हम जैसे करोड़ों फैंस का दिल से शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने साफ कर दिया है कि पसीना, त्याग और फख्र... उन्होंने अपना 100 टका दिया है।
अब मेरे भाई, कुर्सी की पेटी बांध लो। कप्तानी का वो बोझिल सफर जरूर खत्म हुआ है, लेकिन हरमन द बैटर का वो बेखौफ सफर अभी जारी है! अब यह धाकड़ शेरनी सिर्फ और सिर्फ इस खेल से अपने बेइंतहा इश्क के लिए मैदान पर उतरेगी। अब कोई दबाव नहीं, कोई बंदिश नहीं अब सिर्फ गेंदबाजों का धागा खुलेगा!

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