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श्रीधर वेम्बू की प्रेरणादायक कहानी
श्रीधर वेम्बू का जन्म 1968 में तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका की Princeton University से PhD पूरी की।
उन्होंने कुछ समय अमेरिका में नौकरी की, लेकिन उनका सपना अपना ऐसा तकनीकी व्यवसाय बनाना था जो भारत से दुनिया के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करे।
1996 में उन्होंने अपने भाइयों और कुछ साथियों के साथ मिलकर AdventNet की शुरुआत की। शुरुआती दौर में कंपनी को सीमित संसाधनों और छोटी टीम के साथ काम करना पड़ा।
समय के साथ कंपनी ने अपने सॉफ्टवेयर उत्पादों का विस्तार किया और बाद में इसका नाम Zoho Corporation रखा गया। Zoho ने दुनिया भर के व्यवसायों के लिए क्लाउड आधारित सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए।
श्रीधर वेम्बू ने भारत के छोटे शहरों में तकनीकी प्रतिभाओं को अवसर देने पर भी जोर दिया। उनका मानना रहा कि सफल टेक्नोलॉजी कंपनी केवल बड़े महानगरों से ही नहीं बनाई जा सकती।
उन्हें Ramon Magsaysay Award सहित कई सम्मान मिले हैं।
सीख: श्रीधर वेम्बू की कहानी बताती है कि सफलता के लिए हमेशा महानगर या बड़ी शुरुआती पूंजी जरूरी नहीं होती। सही तकनीक, मजबूत टीम और लंबे समय की सोच से छोटे स्थान से भी वैश्विक कंपनी बनाई जा सकती है।
श्रीधर वेम्बू का जन्म 1968 में तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका की Princeton University से PhD पूरी की।
उन्होंने कुछ समय अमेरिका में नौकरी की, लेकिन उनका सपना अपना ऐसा तकनीकी व्यवसाय बनाना था जो भारत से दुनिया के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करे।
1996 में उन्होंने अपने भाइयों और कुछ साथियों के साथ मिलकर AdventNet की शुरुआत की। शुरुआती दौर में कंपनी को सीमित संसाधनों और छोटी टीम के साथ काम करना पड़ा।
समय के साथ कंपनी ने अपने सॉफ्टवेयर उत्पादों का विस्तार किया और बाद में इसका नाम Zoho Corporation रखा गया। Zoho ने दुनिया भर के व्यवसायों के लिए क्लाउड आधारित सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए।
श्रीधर वेम्बू ने भारत के छोटे शहरों में तकनीकी प्रतिभाओं को अवसर देने पर भी जोर दिया। उनका मानना रहा कि सफल टेक्नोलॉजी कंपनी केवल बड़े महानगरों से ही नहीं बनाई जा सकती।
उन्हें Ramon Magsaysay Award सहित कई सम्मान मिले हैं।
सीख: श्रीधर वेम्बू की कहानी बताती है कि सफलता के लिए हमेशा महानगर या बड़ी शुरुआती पूंजी जरूरी नहीं होती। सही तकनीक, मजबूत टीम और लंबे समय की सोच से छोटे स्थान से भी वैश्विक कंपनी बनाई जा सकती है।

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